पिछले दो दिनों से दिल्ली में हो रही अराजक घटनाएं प्रत्येक समझदार नागरिक को चितिंत कर रही हैं। विद्यार्थियों की मांगों के नाम पर किए जाने वाला अराजक प्रदर्शन बहुत सोची-समझी साजिश दिखाई देता है। एक जिम्मेदार न्यूज चैनल ने इसके पीछे जिम्मेदार अराजक तत्वों को अंतरराष्ट्रीय षड़यंत्र से प्रेरित बताया है। मूलरुप से यह आंदोलन अमेरिका में सक्रिय षड़यंत्रकारी व्यक्तियों द्वारा प्रेरित है। यह तथ्य सर्वविदित है कि अमेरिका उस व्यक्ति और देश को सहन नहीं करता जो उनके स्वार्थ पर आघात करता है। अमेरिका स्थित यह सभी षड़यंत्रकारी तत्व उनके स्वार्थपूर्ति में आड़े आने वाले व्यक्तियों को किसी न किसी तरह हटवा देता है अथवा समाप्त ही करवा देता है। भारत में हो रहा वर्तमान आंदोलन भी इन्हीं अंतरराष्ट्रीय तत्वों द्वारा प्रायोजित और प्रेरित है। इन सबका संबंध अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प के कार्यकाल से है। अपने पहले कार्यकाल और दूसरे कार्यकाल वाले ट्रम्प में बहुत अंतर है। इस बार ट्रम्प बहुत आक्रामक और असहनशील हो रहे हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के सूत्रधार डिजिटल कम्युनिकेशंस रणनीतिकार अभिजीत दिपके है। उन्होंने मई 2026 में राजनीतिक व्यंग्य के रूप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की शुरूआत की थी, बाद में लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन में शामिल हुए और उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की। स्पष्ट है आंदोलन मूलतः अमेरिका स्थित कुछ तत्वों द्वारा प्रेरित और प्रायोजित है। यह तत्व भारत विरोधी और मूलतः मोदी विरोधी है। अपने दूसरे कार्यकाल में पदग्रहण करते ही ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय आंतक फैलाना शुरू कर दिया। दुनियाभर के देशों पर अनाप-शनाप टेरिफ लगाना शुरू कर दिया। अधिकतर देशों ने असहाय होकर इस आर्थिक आतंक को सहन कर लिया। जिन्होंने विरोध किया उनके विरूद्ध षड़यंत्र शुरू हो गए। विदित ही है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत विरोधी अमेरिकन शर्तों को मानने से दृढ़तापूर्वक मना कर दिया तब से ट्रम्प मोदी से बहुत नाराज है।
मोदी विरोधी कुछ तत्व अमेरिका में पहले से ही सक्रिय है उनके तार भारत के मोदी विरोधी तत्वों से जुड़े हुए है। इनमें प्रमुख है डीप स्टेट नामक अमेरिका के सरकारी अधिकारियों और अन्य तत्वों का संगठन जो अपने स्वार्थ के विपरित जाने वाले व्यक्तियों को निपटा देता है। कहा तो यहां तक जाता है कि डीप स्टेट ने उन अमेरिकन राष्ट्रपति को भी मरवा देते हैं जो इनकी इच्छानुसार नही चलते। वर्तमान में भारत में चल रहे हिंसक आंदोलन के पीछे अन्य के साथ डीप स्टेट भी है ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है।
दूसरा प्रमुख नाम जार्ज सोरोश का आता है। जॉर्ज सोरोस एक हंगेरियन-अमेरिकी अरबपति निवेशक, हेज फंड मैनेजर है। उन्हें 1992 में ब्रिटिश पाउंड पर शॉर्ट सेलिंग करके बैंक आफ इंग्लैंड को हिला देने वाले और एक अरब का मुनाफा कमाने वाले निवेशक के रुप में जाना जाता है। कहा जाता है कि उनकी इच्छा और स्वार्थ के अनुसार न चलने वाले व्यक्ति अथवा सरकार के विरूद्ध वे कुछ भी कर सकते है। सोरोश का मोदी विरोध दृष्टिकोण सर्वविदित है। कई बार उन पर आरोप लगे कि मोदी सरकार को हटाने के लिए उन्होंने कई बार धन भारत में भेजा। चुनाव के दौरान भी उनके संबंध मोदी विरोधी तत्वों से भी बताए जाते रहे है।
अमेरिका सरकार की जासूसी संस्था सीआईए का संबंध भी वर्तमान मोदी विरोधी आंदोलन से होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।सर्वविदित है कि सीआईए दुनियाभर में सरकारों को गिराता रहा है। नेपाल और बंगलादेश में हुई उथल-पुथल और सत्ता परिवर्तन में भी सीआईए का प्रमुख भाग माना जाता है। अमेरिका का संबंध इसलिए भी प्रमाणित होता है क्योंकि अमरीकिन दूतावास ने तीन दिन पहले ही उनसे संबंधित व्यक्तियों को सूचित कर दिया था कि विद्यार्थियों का आंदोलन होने वाला है।
मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और सामरिक शक्ति के रुप में उभरा है जो कई अंतरराष्ट्रीय तत्वों को पसंद नहीं आ रहा। ट्रम्प तो मोदी से बहुत खार खाए हुए हैं। मोदी ने स्वयं कहा था कि उनकी सरकार किसी की भी ऐसी शर्ते नहीं मानेगी जो देश विरोधी हो और जिससे देश का नुकसान होता हो। उन्होंने खुलेआम कहा था कि मैं जानता हूं कि अमेरिका के आगे न झुकने से उनको व्यक्तिगत रुप से बहुत कीमत चुकानी पड़ सकती है किन्तु वे इसके लिए तैयार हैं। उन्हें व्यक्तिगत हानि की चिंता नहीं। उन्हें चिंता है देश की।
कॉकरोच जनता पार्टी के सर्वेसर्वा अभिजीत दिपके के अचानक अमेरिका से भारत आने के बाद ही यह हिसंक आंदोलन प्रारंभ हुआ। यह भी प्रमाणित करता है कि इस आंदोलन को प्रायोजित करने में अमेरिका के भारत विरोधी तत्व प्रमुख रुप से जिम्मेदार है।
आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि इस हिंसक आंदोलन के पीछे चीन की भी भूमिका हो सकती है। भारत ने जिस तरह से अपनी सुरक्षा नीति से चीन को चारों तरफ से घेर लिया है उससे चीन को बहुत परेशानी है। हिंद महासागर में चीन और भारत की प्रतिद्वंदिता जगजाहिर है, इसलिए इस आंदोलन के पीछे चीन की सक्रिय भूमिका की आशंका व्यक्त की जा रही है।
जिस तरह से आंदोलन हिंसक रुप से चल रहा है उससे स्पष्ट है कि इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी नहीं हो सकती। ये लोग विद्यार्थी बिल्कुल भी दिखाई नहीं देते है। पूरी दिन-रात हिंसक आंदोलन में भाग लेने की अनुमति कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को नहीं देंगे किन्तु इस आंदोलन में जिस तरह से पुलिस से मुठभेड़ की जा रही है उससे स्पष्ट है कि ये सब खरीदे हुए गुण्डे हैं। इनमें से कई आंदोलनकारी खुलेआम कह रहे थे कि मोदी को गोली मार देना चाहिए। निश्चित रूप से ये विद्यार्थियों का आंदोलन नहीं हो सकता।
