एक पुरुष व दो महिलाओं ने लिया देहदान का संकल्प

परिवारजनों के सहयोग से मेडिकल विद्यार्थियों को मिलेगा अध्ययन का अमूल्य योगदान : गोविंद काकानी

रतलाम। जीवन के अंतिम पड़ाव के बाद भी समाजसेवा जारी रखने का संकल्प लेते हुए रतलाम जिले के एक पुरुष एवं दो महिलाओं ने देहदान का निर्णय लिया है। उनके इस निर्णय से मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का प्रत्यक्ष अध्ययन करने में मदद मिलेगी और समाज में देहदान के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा।       यह जानकारी पूर्व संभागीय अंगदान-प्रत्यारोपण प्राधिकरण समिति सदस्य एवं काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी ने दी। उन्होंने बताया कि तीनों देहदान संकल्पकर्ताओं को उनके परिवारजनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त है।

संकल्पकर्ता एवं सहयोगी परिवारजन—

1. श्रीमती इंदु पारख, निवासी कोठारीवास, रतलाम — पुत्री प्रीति जैन, पुत्र ऋषभ कनकमलजी पारख, पुत्रवधू निधि ऋषभ पारख एवं समाजसेवी सुरेंद्र जोशी।

2. श्रीमती राजाबाई मोगरा, निवासी महालक्ष्मी नगर, कालिका माता मंदिर के पीछे — पुत्र महेश कुमार बादरमलजी मोगरा, पुत्रवधू सुनीता मोगरा एवं पौत्री आराध्या मोगरा।

3. यशपाल पिता मोहनलाल शर्मा, निवासी ब्राह्मण गली, ताल, जिला रतलाम — पिता मोहनलाल मदनलाल शर्मा, माता राजबाई शर्मा एवं बहन मनीषा शर्मा, निवासी चित्तौड़, राजस्थान।

संकल्प पत्र एवं पहचान-पत्र की प्रक्रिया:

सभी संकल्प पत्रों की प्रक्रिया के बाद मानव संरचना विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंगरौले द्वारा देहदान पहचान-पत्र तैयार किए गए, जिन्हें डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा के माध्यम से प्रदान किया गया।                                     गोविंद काकानी ने बताया कि देहदान से मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर संरचना का प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। साथ ही नेत्रदान से दो लोगों को ज्योति एवं त्वचा दान से त्वचा जरूरतमंद को स्वास्थ्य लाभ मिल जाता है| देहदान से अंतिम संस्कार में लगने वाली लकडीयों की बचत से पर्यावरण सुधार में बड़ा योगदान मिलेगा|