भगवान कृष्ण की लीलाओं ने मानव जीवन में माधुर्य और प्रेम का संचार किया – पं. शास्त्री

भगवान कृष्ण की लीलाओं ने मानव जीवन में माधुर्य और प्रेम का संचार किया – पं. शास्त्री

 

इंदौर, . भगवान की सभी लीलाएं प्रेम, करुणा और दया से भरपूर हैं। अपनी लीलाओं से वे मनुष्य की काम क्रोध और लोभ की प्रवृत्तियों का नाश करते हैं। वर्तमान युग में वैचारिक प्रदूषण भी बढ़ रहा है। समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। भगवान कृष्ण ने अपनी लीलाओं से मनुष्य के जीवन में माधुर्य और प्रेम का संचार किया है। आज समूचे विश्व को इसी प्रेम और माधुर्य भाव की जरुरत है।

वृंदावन के भागवत किंकर आचार्य पं. कृष्णकांत शास्त्री ने बड़ा गणपति, पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा में आज शाम भगवान कृष्ण एवं रुक्मणी के विवाह का जीवंत उत्सव भी मनाया गया। महामंडलेश्वर स्वामी रामचरणदास महाराज के सान्निध्य एवं राष्ट्रकवि पं.सत्यनारायण सत्तन के आतिथ्य में पं. पवनदास शर्मा, पं. महेश शास्त्री, प्रवीण संग्राम शर्मा, श्रीमती वर्षा शर्मा, ज्योति शर्मा आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विवाह उत्सव के लिए आज कथा स्थल को विशेष रूप से श्रृंगारित किया गया था। जैसे ही कृष्ण और रुक्मणी ने एक दूजे को वरमाला पहनाई, समूचा कथा स्थल भगवान के जयघोष से गूंज उठा। महिलाएं थिरक उठीं। भक्तों ने पुष्प वर्षा कर उत्सव का आनंद लिया। वृंदावन से आए भजन गायकों और संगीतज्ञों ने भी अपने भजनों से समूचे पंचाल को मंत्र मुग्ध बनाए रखा।

आचार्य पं. शास्त्री ने कहा कि जो लोग धन संपत्ति के दम पर प्रभु को पाना चाहते हैं, उन्हें नहीं पता कि भगवान बिकने वाले नहीं है। भागवत मोक्ष का महासागर है। भगवान को पाखंड और प्रदर्शन में लिप्त लोग कतई पसंद नहीं है। अग्नि के पास जाएंगे तो जल जाएंगे, पानी के पास डूब जाएंगे, आंधी के पास उड़ जाएंगे, लेकिन भगवान के पास जाएंगे तो भवसागर के पार लग जाएंगे। कृष्ण और रुक्मणी का विवाह नारी के मंगल का सूचक है। भगवान कृष्ण के प्रेम में निष्काम भाव है। वे अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वे जो भी करते हैं भक्तों के लिए ही करते हैं।