जो जातक रत्न धारण करता है वह ग्रहों के दुष्प्रभाव से बच जाता है

मां भुवनेश्वरी ज्योतिष वास्तु कर्मकांड शोध संस्थान का दो दिवसीय ज्योतिषी सम्मेलन का हुआ समापन

जो जातक रत्न धारण करता है वह ग्रहों के दुष्प्रभाव से बच जाता है

नृसिंह वाटिका में विद्वान पंडि़तों के साथ पत्रकारों को नारद ऋषि पत्रकार अवार्ड से किया सम्मानित,

ज्योतिषी सम्मेलन के दुसरे दिन सैकड़ों अभिलाषी पहुंचे विद्वानों से कुंडली दिखवाने

इन्दौर ।वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह शांति के लिए कई तरह के रत्न का उपयोग कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो जातक रत्न धारण करता है, वह ग्रहों के दुष्प्रभाव से बच जाता है। इसके साथ ही जीवन में आ रही किसी भी प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। उक्त विचार एरोड्रम रोड़ स्थित नृसिंह वाटिका में मां भुवनेश्वरी ज्योतिष वास्तु कर्मकांड शोध संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय ज्योतिषी सम्मेलन के समापन अवसर पर विद्वान वक्ताओं ने सभी ज्योतिषियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। विद्वानों ने रत्नों से ग्रहों पर होने वाले प्रभाव व महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले कठोर रंग-बिरंगे पत्थर हैं । परंतु हर रंग बिरंगे यह पत्थर किसी न किसी ग्रह के अंतर्गत माने गए हैं या उन ग्रहों के साथ इनका संबंध है। पृथ्वी पर हर प्राणी पर ग्रहों का अनुकूल – प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तब प्रतीकूल ग्रहों का अनुकूल प्रभाव पाने के लिए मनुष्य रत्न धारण करता है। यह रत्न धारण ज्योतिष के अनुसार ही करना चाहिए।

वहीं दिल्ली से आचार्य पं. अनिल वत्स ने भी ज्योतिषी विद्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विद्या व ज्योतिष के विचार को हम उस स्थान पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं जो उसका उचित स्थान हैं।

लाल किताब के प्रसिद्ध गुरूदेव जीडी वशिष्ठ ने भी वास्तु पर अपने विचार रखते हुए सभी को वास्तु दोष का महत्व बताने के साथ ही घरों में कौन से रंग से वास्तु दोष समाप्त होगा।

मां भुवनेश्वरी ज्योतिष वास्तु कर्मकांड शोध संस्थान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संतोष भार्गव ने बताया कि दो दिवसीय ज्योतिषी वास्तु सम्मेलन में कुंडली ज्योतिषी, लाल किताब की विद्या, गणितीय ज्योतिष, नंदी नाडी ज्योतिष, पंच पक्षी सिद्धांत, हस्तरेखा ज्योतिष नक्षत्र ज्योतिष, अंगूठा शास्त्र, सामुद्रिक विद्या, चीनी ज्योतिष, वैदिक ज्योतिष, टैरो कार्ड के जानकारों सहित सहित 350 विद्वान पंडि़तों का जमावड़ा रहा। सभी ने अपने-अपने शोध पत्र का वाचन कर अपने विचार भी खुल कर रखे। समापन अवसर पर सभी विद्वान ज्योतिषी का सम्मान भी अतिथियों द्वारा किया गया। इसके साथ ही इन्दौर शहर के कलमकारों को भी नारद ऋषि पत्रकार अवार्ड से सम्मानित किया गया।

समापन अवसर पर मुख्य अतिथि मनोज परमार, दिल्ली आचार्य पं अनिल वत्स, लाल किताब के प्रसिद्ध गुरुदेव जीडी वशिष्ठ, आचार्य पंडित शुभेष सरमन धर्माचार्य, प्रो. (डॉ.) अनिल मित्रा ज्योतिष शिरोमणि एवं अध्यक्ष ग्लोबल एस्ट्रो समाधान प्रा. लिमिटेड, ज्ञानगुरु डॉ. धनेशमणि त्रिपाठी, पं. रमेश भोजराज द्विवेदी, अरुण जी बंसल, मुंबई से हितेश गुरुजी, जाय बनर्जी,डाक्टर श्री राजकुमार , गुरुदेव रमेश जी सेमबाल हरिद्वार रुडकी, के ए दुबे पद्मेश, मीताजानी मिरल फाउंडेशन अहमदाबाद, डॉक्टर कुमार जोशी, कल्पेश जी चौहान , डॉ. हेमचन्द्र पाण्डेय, राजगुरू के. आर. उपाध्याय, गौतम गुरुजी, पं. राजेश दुबे, डॉ. विद्या भूषण सिंह, मुंबई से पं. विनोद शास्त्री, , राजस्थान से डॉ. राघव जी भट्ट, पंडित गौतम गुरुजी पंडित के .आर. उपाध्याय डॉ. ए.के शर्मा, आचार्य जगदीश, राजगुरु डा.प्रकाश सारस्वत डॉक्टर दिनेश सोमानी, बेंगलुरु से दीपिका जैना, , कोलकाता – संतोष लोहिया, एवं अन्य प्रांतों से भी ज्योतिर्विद सम्मिलित हुए थे।

ज्योतिष विद्या में मनुष्य की सभी परेशानियों का है (हल)– श्री वाधवानी

राष्ट्रीय अध्यक्ष पं संतोष भार्गव और प्रदेश प्रवक्ता डॉ,संतोष वाधवानी ने जानकारी देते हुए बताया कि
एक तिथि एक त्यौहार का मिटाए संचय विद्वानों ने दो पंचांग के भ्रम की स्थिति दूर करने की बात कही

ज्योतिष विद्या ही एक ऐसा माध्यम है जिसमें ग्रहों की स्थिति के अनुसार पूर्व में ही पता कर सकते हैं आने वाली समस्या और शुभ कार्य के संकेत वर्तमान एवं भविष्य मैं होने वाले कार्यों का पूर्व ही आकलन किया जा सकता है

प्रदेश प्रवक्ता श्री वाधवानी ने बताया कि पंडित गिरीश व्यास ने कहा कि एक देश एक तिथि और एक त्यौहार शहर में मनाई जाय इसके लिए सतत प्रयास की आवश्यकता है सम्मेलन में दिल्ली से आए अनिल वत्स और गुरुदेव जीडी वशिष्ठ विशेष रूप से रहे उपस्थित सम्मेलन में 26 में को पहला सत्र सुबह 11:00 बजे चालू हुआ जिसमें कई ज्योतिष से जुड़े वक्ताओं ने अपना उद्बोधन देकर ज्योतिष में अपनी सेवाएं दे रहे ज्योतिषाचार्य को अपने अनुभव से रूबरू कराया

विनोद गोयल, नगर प्रतिनिधि