नेशनल लोक अदालत में जिले में न्यायालय में 1060 लंबित प्रकरणों का निराकरण

रतलाम । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नईदिल्ली (नालसा) एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार आज 13 सितंबर 2025 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन ए.डी.आर. भवन, जिला न्यायालय रतलाम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष सुश्री नीना आशापुरे द्वारा मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया।
नेशनल लोक अदालत में सम्पूर्ण जिले में न्यायालय में लंबित समझौता योग्य 1623 प्रकरणों मे से 1060 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें 2474 व्यक्ति लाभान्वित हुए तथा कुल 76981523/ रूपये का अवार्ड पारित किया गया। उक्त लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रयास कर मोटर दुर्घटना दावा के 55 प्रकरणों का निराकरण कर 20693500/- रूपये का अवार्ड पारित किया गया तथा 78 व्यक्ति लाभान्वित हुए।
नेशनल लोक अदालत में प्री लिटिगेशन (मुकदमा पूर्व) प्रकरणों में बैंकों/फायनेंस कं. एवं बी.एस.एन.एल. के 22 प्रकरणों का निराकरण कर 1716856/- रूपये की राशि जमा करवाई गई। जिसमें 30 व्यक्ति लाभान्वित हुए।
विद्युत विभाग रतलाम के 155 प्रकरणों का निराकरण कर 2867288/- रूपये की राशि जमा करवाई गई।
नगर निगम रतलाम से प्राप्त जानकारी अनुसार जलकर के 211 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 3999000/- राशि जमा कराई गई तथा सम्पत्ति कर के 272 प्रकरणो में 3567728/- राशि जमा करवाई गई।
इस प्रकार संपूर्ण जिले में विद्युत विभाग, जलकर, सपंत्तिकर, बी.एस.एन.एल. कुल 357 प्रि लिटिगेशन प्रकरणो का निराकरण किया गया तथा 8056258/- रूपये की राशि जमा करवाई गई। जिसमे कुल 549 व्यक्ति लाभान्वित हुए।
नगर निगम की उद्यानिकी शाखा द्वारा समझौता करने वाले पक्षकारों को वितरण करने हेतु निःशुल्क पौधे प्रदाय किये गए। जिनको संबंधित पीठासीन अधिकारी द्वारा पक्षकारो को वितरण किया गया।
कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार तहसील (राजस्व) न्यायालयों में 582 फोजदारी प्रकरणों तथा 270 राजस्व (रेवेन्यू) प्रकरणों का निराकरण किया गया।

कुटुम्ब न्यायालय द्वारा पति-पत्नी को सकुशल घर भेजा

पत्नी ‘एक्स‘ एवं पति ‘वाय‘ के मध्य अप्रैल 2022 मे ंविवाह होने के पश्चात् वैचारिक मतभेद होने से वे 23 अप्रैल 2024 से पृथक-पृथक निवास करने लगे और उनके द्वारा 6 अगस्त 2025 को सहमति से विवाह विच्छेद हेतु याचिका प्रस्तुत की गई थी। उभयपक्ष की एक पुत्री भी पैदा हुई थी। उभयपक्ष को उनके पृथक-पृथक निवास करने से उनकी पुत्री के भविष्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव के बारे में समझाइश दी गई तथा साथ-साथ रहने पर उनके एवं पुत्री के भविष्य में क्या-क्या फायदा होंगे, इसके संबंध में भी उन्हें समझाइश दी गई जिस पर उनके द्वारा साथ निवास करना स्वीकार किया और नेशनल लोक अदालत में उपस्थित होकर प्रकरण में कार्यवाही समाप्त कराने के उपरांत निवास करने हेतु साथ में चले गये।
इसी प्रकार पत्नी ‘एक्स‘ द्वारा स्वयं एवं पुत्र के भरण पोषण हेतु पति ‘वाय‘ के विरूद्ध याचिका प्रस्तुत की थी, जिसमें उसके द्वारा पति एवं उसके परिजनों के विरूद्ध दहेज के लिये प्रताड़ित किये जाने एवं खाने पीने का सामान छिपाकर रख देने के आक्षेप लगाये गये थे। उभयपक्ष का दिनांक 21.06.2022 को विवाह हुआ था, लेकिन लगभग 05 माह बाद ही वे प्रथक निवास करने लगे थे। उभयपक्ष को वैवाहिक महत्व के बारे में समझाया गया और साथ रहने के सुखद परिणाम तथा पृथक रहने के दुष्प्रभावों के संबंध में समझाइश दी गई। उभयपक्ष के अधिवक्तागण द्वारा भी पक्षकारों को समझाया गया, जिसके उपरांत उनके द्वारा नेशनल लोक अदालत में साथ रहने का निर्णय लिया गया और आज साथ रहने के लिये रवाना हो गये।
इसी प्रकार दो अन्य प्रकरण भी पत्नी द्वारा पति के विरूद्ध भरण पोषण दिलाये जाने हेतु पेश किये थे जिनमें भी उनको समझाइश दिये जाने के उपरांत वे साथ निवास करने हेतु सहमत हुए और उन्हें साथ में निवास करने हेतु न्यायालय से भेजा गया।
साथ जाने वाले पक्षकारों को प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री नीना आशापुरे, की ओर से सुखद भविष्य के लिये पौधे भी भेंट किये गये तथा उन्हें एवं उनके परिजनों को मिठाई खिलाई जाकर सुखद भविष्य की शुभकामनाएं देकर साथ रहने हेतु भेजा गया।