समाज की समस्या का निदान समाज ही कर सकता है- कंचन बहन

भूदान आन्दोलन-भूदान यज्ञ की 75वीं वर्षगांठ पर समिति में हुआ कार्यक्रम

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति में समसामयिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें ब्रह्मविद्या मंदिर पवनार, वर्धा की सुश्री कंचन बहन ने विनोबा जी के भूदान यज्ञ के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा और भूदान आन्दोलन पर अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। कंचन बहन मूलतः बनारस में जन्मीं, विनोबा जी से प्रभावित होकर असम, उड़ीसा, महाराष्ट्र और अन्य प्रांतों में सर्वोदय के लिये काम किया और आज समिति में उन्होंने विनोबाजी के विचारों को प्रस्तुत करके उनकी यादों को ताजा कर दिया। कंचन बहन ने कहा कि विनोबाजी सर्वे भवन्तु सुखिनः तथा सबै भूमि गोपाल की इनको मूर्तरुप दिया, उनका कहना था कि भारत को अपने अध्यात्म के साथ आधुनिक विज्ञान को भी जोड़ना पड़ेगा। जिस देश में महाभारत का उदाहरण, सुई की नोंक बराबर भूमि न देने पर महाभारत हुआ हो, उसी देश में संत विनोबा भावे को हजारों एकड़ की भूमि स्वेच्छा से लोगों ने प्रदान की, जिसमें सिर्फ अमीर लोग ही नहीं रहे बल्कि वो गरीब किसान भी थे जिनके मन में सबको साथ लेकर चलने की भावना थी। विनोबाजी कहते थे कि दान करो मगर मदद की भावना से नहीं, दया की भावना से नहीं बल्कि संग्रह के विभाजन को महत्व देते हुये। कंचन बहन ने विनोबा जी से जुड़े भूदान यज्ञ के साथ डाकुओं द्वारा आत्मसमर्पण के भी मार्मिक प्रसंग सुनाये एवं बताया कि उनका प्रभाव पूर्वी पाकिस्तान में भी कितना पड़ा कि वहाँ भी लोगों ने अपनी जमीनें लोगों को दान की। जब उनकी यात्रा के समय जय पाकिस्तान के नारे लगाये तो विनोबाजी ने जय जगत का नारा लगाया और आज वह समाज के लिए महामंत्र बन गया। उनका कहना था कि समाज की समस्या कोई एक व्यक्ति या शासन नहीं सुलझा सकता, समाज को ही अपनी समस्या का निराकरण करना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि भारतीय इतिहास में सबसे पहला भूदान का प्रसंग राजा बलि और विष्णु के प्रसंग से जुड़ता है। हमारे आध्यात्मिक चेतना का उद्देश्य रहा कि सभी लोग सुखी हो। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला के प्राध्यापक डॉ. जितेन्द्र जाखेटिया ने 1960 में इंदौर में एक माह तक रहे। विनोबाजी की यादों और उनके कार्यों का स्मरण दिलाया और बताया कि भूदान आंदोलन 18 अप्रैल, 1951 को उन्होंने शुरु किया था। विनोबाजी की इंदौर यात्रा के समय, इंदौर शहर भी एक गंदे शहरों में गिना जाता था। विनोबाजी ने भारत स्वच्छता अभियान इंदौर से ही शुरु किया था और उसका सुखद परिणाम आज हम सब लोगों को देखने को मिल रहा है।
इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राओं ने मानवता का आरोहण नाटक का मंचन भी किया, जो विनोबा जी की पैदल यात्रा और भूदान से सम्बन्धित विषय पर रहा। दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात अतिथियों का स्वागत प्रधानमंत्री श्री अरविन्द जवलेकर, समाजसेवी श्री अनिल त्रिवेदी, श्री घनश्याम यादव, श्री अरविन्द ओझा ने किया। इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग की प्रमुख डॉ. सोनाली नरगुन्दे का भी समिति ने अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन विनोबाजी के जीवन पर संक्षिप्त विवरण आदि विषयों को लेकर शोध मंत्री डॉ. पुष्पेन्द्र दुबे ने विचार रखे। अंत में आभार प्रचार मंत्री हरेराम वाजपेयी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्रायें, साहित्यकार, समाजसेवी एवं काफी संख्या में प्रबुद्धजन उपलब्ध थे।