ईरान युद्ध – बुरे फंसे ट्रम्प

प्रो. देवेन्द्र कुमार शर्मा, रतलाम

ईरान लंबे समय से एटम बम बनाने की प्रक्रिया से गुजर रहा है। एटम बम बनाने का उसका उद्देश्य भी स्पष्ट रहा है। एटम बम बनाकर ईरान इजरायल को समाप्त करना चाहता है। ईरान ने इजरायल के विरूद्ध ही हमास और हिजबुल्ला जैसे खतरनाक आतंकी संगठन बनाए हैं। अमेरिका हमेशा ईरान को एटम बम ना बनाने की चेतावनी देता रहा है किन्तु ईरान ने अमेरिका की इच्छा का कभी भी आदर नहीं किया। ईरान इजरायल के अस्तित्व के लिए हमेशा खतरा बना रहा। वैसे तो सभी मुस्लिम देश इजरायल के निर्माण के विरूद्ध ही रहे हैं किन्तु धीरे-धीरे कुछ मुस्लिम देशों ने इजरायल के अस्तित्व से समझौता कर लिया था। कहते हैं ईरान एटम बनाने के बहुत करीब पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच में कई बार बातचीत हुई किन्तु कोई शांति पूर्ण निर्णय निकल नहीं पाया। आखिरकार अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खोमेनी को मार दिया और परिणाम स्वरूप अमेरिका-इजरायल ईरान के बीच युद्ध प्रारंभ हो गया।

ईरान पर हमला करने के पूर्व ट्रम्प ने अपने सलाहकारों से कई बार बात की। ईरान पर हमला करने के पहले ट्रम्प ने अपने सलाहकारों से सलाह ली, उनके एक बड़े सैनिक कमांडर ने ट्रम्प से कहा कि युद्ध प्रारंभ तो कर लोगे लेकिन उसमें से निकलोगे कैसे। इतिहास गवाह है कि युद्ध प्रारंभ करना आसान होता है, किन्तु समाधान और समापन बहुत कठिन होता है। उदाहरण के लिए पुतिन ने यूक्रेन पर यह सोचकर हमला किया था कि एक सप्ताह में यूक्रेन हार मान लेगा। चार वर्ष हो गए लेकिन युद्ध अभी भी चल रहा है। ईरान हार मानने या समझौता करने को तैयार नहीं है। वह एटम बम बनाने की जिद पर अड़ा हुआ है। शायद अमेरिका ने सोचा भी नहीं था उससे अधिक भीषणता से ईरान युद्ध लड़ रहा है। उसने उन सभी मुस्लिम देशों से भी आक्रमण किए जहां-जहां अमरीका के सैनिक अड्डे है।

ईरान ने बहुत शक्तिशाली मिसाइल और ड्रोन बड़ी संख्या में बना रखे है। ईरानी मिसाइल की मारक क्षमता भी बहुत लंबी दूरी की है। उसकी मिसाइल अमेरिका तक पहुंच सकती है। उसके ड्रोन भी बहुत शक्तिशाली है और आसपास के देशों में तबाही मचा रहे हैं।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खोमेनी के बेटे बने है। उन्होंने भी कह दिया है कि ईरान किसी भी तरह युद्ध में समर्पण नहीं करेगा और अमेरिका-इजरायल से लोहा लेता रहेगा। ट्रम्प ने अमेरिका को बुरी तरह फंसा दिया है। ईरान किसी भी तरह झुकने को तैयार नहीं है और लगातार आक्रामक बना हुआ है। ईरान की मिसाइल की डर से अमेरिका के जंगी जहाजों को भी पीछे हटना पड़ा। ट्रम्प उलझन में हैं, करे तो क्या करें। ईरान उनकी अपेक्षा से अधिक शक्ति से युद्ध लड़ रहा है। उसकी मिसाइलें इजरायल की राजधानी तेलअवीव पर भी तबाही मचा रही है। ऐसा लगता है कि अमेरिका एक लंबे युद्ध में फंस गया है। इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने बहुत लंबे-लंबे युद्ध लड़े किन्तु किसी में भी उसे निश्चित जीत प्राप्त नहीं हुई। तस्वीरें आ रही है कि ट्रम्प अब पादरियों की शरण में पहुंच गए है। उन्होंने पादरियों को अपने कार्यालय में बुलाकर प्रार्थना की। ऐसा लगता है कि ईरान की शक्ति का आंकलन ट्रम्प ठीक से नहीं कर पाए। ट्रम्प ने सोचा था कि ईरान के सुप्रीम कमांडर अयातुल्ला खोमेनी को मार देने से ईरान आत्मसमर्पण कर देगा किन्तु ईरान अधिक शक्ति से आक्रामक होता जा रहा है। प्रतिदिन के युद्ध का खर्च भी अमेरिका को बहुत भारी पड़ रहा है। यह बोझ अमेरिका के नागरिकों को ही उठाना है।

ट्रम्प न युद्ध जीत पा रहे है ना ही उसे बंद कर पा रहे है। भई गति सांप छंछूदर केरी वाली कहावत ट्रम्प पर पूरी तरह लागू होती है। ट्रम्प ने जब चुनाव लड़ा तब उन्होंने कहा था कि उनके पहिले कार्यकाल में उन्होंने युद्ध बंद करवाए, कोई युद्ध नहीं लड़ा। यूक्रेन युद्ध को भी एक सप्ताह में बंद करवाने की घोषणा ट्रम्प ने की थी, लेकिन यह भी संभव नहीं हुआ। अब ट्रम्प खुद ऐसे युद्ध में उलझ गए है जिसमें से विजयी होकर निकलना अमेरिका के लिए लगभग असंभव है। ट्रम्प ने जितना अंदाज लगाया था ईरान उससे अधिक शक्तिशाली निकला। ट्रम्प बहुत चिंता में होंगे।

ईरान खाड़ी देशों पर लगातार हमले कर रहा है। जहां-जहां अमेरिकी सैनिक अड्ढे है वहां ईरान लगातार हमले कर रहा है। इजरायल पर भी भारी मिसाइल हमले कर रहा है। इजरायल भी ईरान के अतिरिक्त कई अन्य देशों से युद्ध लड़ रहा है। एक तरह से मिनी विश्व युद्ध चल रहा है। यूक्रेन में पहले से ही 4 साल से युद्ध चल रहा है। खाड़ी देश कोशिश कर रहे है कि युद्ध किसी तरह बंद हो जाए क्योंकि विश्व युद्ध से इन देशों को बहुत नुकसान हो रहा है जबकि अमेरिका ईरान से लम्बा युद्ध लड़ने की तैयारी कर रहा है। ट्रम्प बुरे फंस गए हैं। अब अमेरिका के लिए युद्ध बंद करना बहुत कठिन लग रहा है। ईरान जिस तरह से अमेरिकी हमलों का जवाब दे रहा है उससे स्पष्ट है कि ईरान आसानी से हारने वाला नहीं है। शायद ट्रम्प ने ईरान की इच्छाशक्ति को कमजोर आंका था। ऐसा लगता नही कि ट्रम्प युद्ध आसानी से जीत जाएंगे। वास्तव में ट्रम्प ईरान युद्ध में बुरे फंस गए है।