– प्रो. देवेन्द्र कुमार शर्मा
प्रत्येक देश के लिए अपनी रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। सुरक्षा नीति पर दो दृष्टिकोण अपनाए जा सकते हैं- सुरक्षात्मक और आक्रामक। सुरक्षात्मक नीति में देश अपने शत्रु देश के द्वारा की गई कार्रवाई के विरूद्ध प्रतिक्रिया करता है। ऐसी कार्रवाई करने वाले देश अधिकतर पड़ोसी देश होते है। जैसे पाकिस्तान अपने बनने के समय से ही भारत विरोधी कार्रवाई करता रहा है। वैसे ही बंगलादेश निर्माण के समय से अधिकतर समय भारत विरोधी ही रहा है। हिंदू देश नेपाल चाइना के खेमें में चला गया। भारत का निकट पड़ोसी श्रीलंका ने कोलंबों बंदरगाह 99 वर्ष की लीज पर चीन को दे दिया। भारत के बहुत निकट अरब सागर में छोटा सा द्वीप मालदीप चीन के प्रभाव में भारत विरोधी नीति अपनाता रहा। भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी चीन हमेशा भारत विरोधी रहा है और भारत के बहुत बड़े भू-भाग पर कब्जा जमाए बैठा है। हमारा उद्देश्य सभी देशों के विरूद्ध हमारी सुरक्षा नीति का विश्लेषण करना है।
प्रारंभ पाकिस्तान से करते है। हम सभी जानते ही है कि 1947 के पहले पाकिस्तान एवं बंगलादेश पूर्वी पाकिस्तान के नाम से भारत का ही भाग थे। सभी जानते ही है कि पाकिस्तान के निर्माण के लिए लाखों हिन्दुओं का खून बहाया गया एवं हिन्दू महिलाओं के साथ कुकर्म किया गया। देश के विभाजन की भारी कीमत बहुसंख्यक हिन्दुओं को चुकानी पड़ी। विभाजन से अब तक पाकिस्तान भारत के प्रति दुश्मनी निभाता रहा है। वह हमेशा भारत से युद्ध करने को तैयार रहा है। विभाजन के कुछ दिन बाद ही कश्मीर को जबरन पाकिस्तान में मिलाने के लिए भारत पर आक्रामण कर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सदाशयता का परिचय देते हुए विजय की ओर अग्रसर होती हुई भारतीय सेना को रोक दिया और मामला यूएनओ में ले गए। भारतीय भूमि का बहुत बड़ा भाग आज भी पाकिस्तान के कब्जे में है जिसे आजाद कश्मीर के नाम से जाना जाता है। यह सुरक्षा नीति की बहुत बड़ी गलती थी जिसका परिणाम देश आज भी भुगत रहा है। पाकिस्तान हमेशा दुश्मनी पूर्ण व्यवहार भारत के विरूद्ध करता रहा है फिर भी नेहरू जी ने उसे पाकिस्तान को सर्वाधिक प्रिय देश का दर्जा दे रखा था। जिसे बाद में मोदी सरकार ने समाप्त किया।
पाकिस्तानी आतंकी हमले का उत्तर भारत ने आपरेशन सिंदूर करके दिया लेकिन पाकिस्तान ने सीमित कार्रवाई से कोई सबक नहीं सीखा। अभी भी आतंकी भारत में पाकिस्तान द्वारा भेजे जा रहे । कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुए फिर भी पाकिस्तान ने कोई सबक नहीं सीखा। पाकिस्तान सुधरने को तैयार नहीं। भारत जो सीमित कार्रवाई पाकिस्तान के विरूद्ध करता है उसका कोई स्थायी परिणाम नहीं निकलता। इसलिए यह आवश्यक है कि पाकिस्तान के विरूद्ध भारत निरंतर आक्रामक कार्रवाई करता रहे ताकि पाकिस्तान की बुद्धि ठीक रहे। आक्रमण ही सर्वोत्तम सुरक्षा है, निरर्थक वाक्य नहीं है।
बंगलादेश पर पूरा लेख लिख चुके है। बंगलादेश में हो रहे हिन्दुओं के खून-खराबे के विरूद्ध भारत कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं कर रहा है। भारत ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे बंगलादेश में होने वाली घटनाओं से उसे भारत को कुछ लेना-देना नहीं। परिणाम स्वरूप वहां के हिन्दू लावारिस हो गए है और कोई उनकी रक्षा करने वाला नही। यदि यही नीति भारत अपनाता रहा तो पाकिस्तान जैसी हालत हो जाएगी। विभाजन के समय पाकिस्तान में 24 प्रतिशत हिन्दू हुआ करते थे, अब 1 प्रतिशत हिन्दू बचा है। सभी को मार-मारकर मुसलमान बना लिया गया। बंगलादेश में भी यही हो रहा है। अपने को सुरक्षित रखने के लिए वहां के हिन्दुओं को भी इस्लाम अपनाना पड़ेगा या वे मार दिए जाएंगे।
नेपाल लंबे समय से भारत विरोधी होता जा रहा है। चीन ने नेपाल में अपना प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा लिया है। जो भारत की सुरक्षा के लिए हितकारी नहीं है। नेपाल और भारत के बीच में खुली सीमा है।भारत विरोधी तत्व बिना रोक-टोक भारत में आते-जाते रहते है और भारत विरोधी गतिविधियां चलाते रहे है। खुली सीमा होने के कारण ऐसे देश विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करना संभव नही होता, इसके लिए भी सरकार को विचार करना चाहिए और नेपाल पर दबाव बनाकर भारत विरोधी तत्वों को नियंत्रित करना चाहिए। स्वतंत्रता के बाद से भी भारत की नीति अन्य देशों में हस्तक्षेप नहीं करने की रही है किन्तु इस प्रकार की नीति से देश को बहुत हानि होती है। भारत को अपनी शांति पूर्ण नीति त्यागकर आक्रामक सुरक्षा नीति अपनाना चाहिए। बार-बार यह कहने का कोई अर्थ नहीं कि आपरेशन सिंदूर अभी चालु है। चालाक दुष्ट के साथ सज्जनता की नीति का कोई अर्थ नहीं होता। भारत के दो मुख्य पड़ोसी चीन और पाकिस्तान बहुत शातिर चालाक है। उनके साथ सज्जनता का व्यवहार करने का कोई अर्थ नहीं होता। जवाहरलाल नेहरू के समय चीन 80 हजार वर्ग भारत की भूमि पर कब्जा कर चुका है जो आज भी उसके कब्जे में है। तब भी नेहरू ने संसद में यह जवाब दिया कि वह तो बेकार की जमीन है वहां पर कुछ भी पैदा नहीं होता। इस तरह की नीति किसी भी देश की सुरक्षा के लिए उचित नहीं होती। उसी भूमि में होकर चीन ने पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान के बंदरगाह तक सड़क बना ली है। अब यह संभव नहीं लगता कि कभी भारत उस भूमि को ले पाएगा। नेहरू सरकार द्वारा अपनाई गई अनुचित नीति के कारण भारत बहुत बडा भू-भाग खो चुका है।
अब समय आ गया है कि भारत पूरी तरह आक्रामक नीति ही अपनाए। वर्तमान में भारत बहुत शक्तिशाली देश है और सरकार भी कठोर निर्णय लेने में सक्षम है। अतः सुरक्षात्मक नीति त्यागकर पड़ोसियों के विरूद्ध आक्रामक नीति अपनाना चाहिए।


