रतलाम। कस्तूरबा नगर, गली नंबर 6 स्थित बगीचे में मनीषा–मनोज शर्मा मित्र मंडल द्वारा आयोजित नानी बाई का मायरा कथा के द्वितीय दिवस बुधवार, 7 जनवरी 2026 को श्रद्धा और भक्ति के भाव से सम्पन्न हुआ। कथा के द्वितीय दिवस में नानी बाई की अटूट आस्था, विश्वास और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का मार्मिक वर्णन सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।
कार्यक्रम के आरंभ में पोथी पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें सर्व ब्राह्मण महासभा, सर्व ब्राह्मण महासभा महिला मंडल, बार एसोसिएशन एवं प्रॉपर्टी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर आयोजक श्रीमती मनीषा शर्मा एवं श्री मनोज शर्मा का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। अतिथियों ने भी आयोजकों का सम्मान करते हुए आयोजन की सराहना की।
कथावाचक अनिरुद्ध मुरारी ने द्वितीय दिवस की कथा में कहा कि नानी बाई का मायरा केवल एक लोककथा नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण पर अडिग विश्वास की जीवंत मिसाल है। कथा में वर्णन किया गया कि नानी बाई मायरा लेकर अपनी पुत्री के ससुराल की ओर बिना धन, वस्त्र और आभूषण के निकल पड़ती हैं। उनके पास केवल एक दृढ़ विश्वास होता है कि उनके मायरे का भार अब गिरधर गोपाल स्वयं उठाएंगे।
कथा में बताया गया कि मार्ग में समाज द्वारा किए गए उपहास और प्रश्नों के बावजूद नानी बाई का विश्वास डगमगाता नहीं। वे हर प्रश्न के उत्तर में मुस्कुराकर कहती हैं— “मेरा मायरा तो मेरा भाई श्याम भरेंगे।” द्वितीय दिवस की कथा में प्रभु की गुप्त लीलाओं के संकेत भी मिलते हैं, जब यात्रा के दौरान नानी बाई को अदृश्य सहारा मिलता है और यह स्पष्ट होता है कि भगवान हर कदम पर भक्त के साथ हैं।
श्री मुरारी ने कहा कि द्वितीय दिवस का संदेश यही है कि जब भक्त पूर्ण समर्पण भाव से प्रभु पर भरोसा करता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है और भगवान स्वयं व्यवस्था करते हैं।
कथा के दौरान श्री मुरारी जी द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों पर महिलाओं एवं पुरुषों ने भक्ति भाव से नृत्य किया। अंत में आरती का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी, निगम अध्यक्ष मनीषा–मनोज शर्मा सहित मित्र मंडल के सदस्यों ने सहभागिता की।
कथा संयोजक श्रीमती मनीषा शर्मा ने बताया कि नानी बाई का मायरा प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से प्रारंभ होता है। उन्होंने धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त करने का अनुरोध किया।



