संकट से प्रेरणा तक: कोटड़ा के रूपाजी गरवाल ने गो-सेवा को बनाया जीवन का आधार
रतलाम.। विपरीत परिस्थितियों में भी सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने वाली कोटड़ा गांव की श्री गणेश गौशाला आज न केवल गो-सेवा का केंद्र है, बल्कि एक आदिवासी परिवार की निष्ठा और समर्पण का जीवंत उदाहरण भी है।
ईश्वरीय प्रेरणा से शुरू हुई सेवा यात्रा
गौशाला के संचालक श्री रूपाजी गरवाल ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व एक गंभीर पारिवारिक विवाद में घायल होने के बाद उनका जीवन दिशा बदल गया। अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटते ही उन्हें ईश्वरीय प्रेरणा मिली और वे राजस्थान के पाटी गांव स्थित गौशाला में निःशुल्क सेवा के लिए पहुँचे। यहाँ उन्होंने गौ-पालन और गौशाला प्रबंधन का गहन अनुभव अर्जित किया।इसी अनुभव के आधार पर रूपाजी गरवाल और उनके परिवार ने कोटड़ा में 125 से अधिक बीमार और असहाय गौवंश की सेवा का संकल्प लिया।
दूरस्थ क्षेत्र में सेवा का संघर्ष
गौशाला मुख्य मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर अंदर स्थित होने के कारण भोजन सामग्री और अन्य सहयोग जुटाने में लगातार कठिनाइयाँ आती हैं। इसके बावजूद ग्रामवासियों के सहयोग से बीमार एवं लाचार गायों को समय पर सुरक्षित रूप से गौशाला पहुँचाया जाता है। यह सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण है।
वाघेला समिति का निरीक्षण — आत्मनिर्भरता की ओर कदम
हाल ही में वाघेला गौ-सेवा जीव दया समिति के प्रमुख दिनेश वाघेला एवं सदस्यों ने गौशाला का निरीक्षण किया। साथ ही गौशाला के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने वाघेला गोसेवा जीव दया समिति प्रमुख दिनेश वाघेला का स्वागत एवं सम्मान भी किया गया। दिनेश वाघेला ने कहा कि किस तरह से हम गोबर की खाद, गोमूत्र आदि से धन अर्जित कर गौशाला को संचालित कर सकते हैं।दल में दिनेश वाघेला, बाबूलाल सिसोदिया, रतनेश विजयवर्गीय , निर्मल अमालिया, संतोष टांक, मोतीलाल जैन,रुपा गिरवाल,महेंद्र जाट सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान गौ-मूत्र भंडारण तथा खाद की बिक्री की समस्याएँ सामने आईं। समिति ने गौशाला को आगामी समय में 80% आत्मनिर्भर बनाने हेतु आवश्यक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
परिवार सहित समर्पित गो-सेवक
संचालक रूपाजी गरवाल और उनका परिवार बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात गो-माता की सेवा में लगे हुए हैं। अतिथियों ने परिवार के इस समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि निस्वार्थ सेवा ही वास्तविक सुख का मार्ग है।
इस कार्यक्रम में राकेश मईडा, रंगलाल झोड़िया, ईश्वर गरवाल, रमेश गरवाल, नानुराम गरवाल, झिथरा वसुनिया, जवरिया डामर सहित समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे। उक्त जानकारी दिनेश वाघेला ने दी।




