कलेक्टर का आदेश लोकतंत्र के असुलों के खिलाफ

रतलाम। जिस अधिकारी का कार्यालय लोकतान्त्रिक मुल्यों की रक्षा के लिए सदैव खुला रहता है जन समस्याओंऔर व्यक्तिगत शिकायतों को लेकर फरियाद करने कलेक्टर के पास पंहूचते है लेकिन हाल ही में जारी आदेश के तहत जनता जनार्दन, राजनैतिक सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के प्रदर्शन पर दो माह के लिये रोक लगाकर लोगों की नाराजगी को बडा दिया है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भाजपा के पूर्व महांमत्री निर्मल कटारिया ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में प्रशासन के इस आदेश की आलोचना करते हूए इसे पार्टी को नियमों के विपरीत जनता को परेशान करने वाला कदम बताया है। इससे उन अधिकारियो, कर्मचारियों को बल मिलेगा जिनके खिलाफ धरना प्रदर्शन करने के लिए लोग बाध्य होते है। अभी एसी कोई स्थिति निर्मित नही हूई जिससे प्रशासन को यह आदेश जारी करना पडे. कलेक्टर कार्यालय में भी अनावश्यक पुलिस तैनात कर दी गई है जिससे आम आदमी कलेक्टर से नही मिल सकता। टोका टाकी से लोग परेशान होकर बिना अपनी बात कहें वापस लोट जाते है।
श्री कटारिया ने मुख्यमंत्री तथा मुख्यसचिव को पत्र लिखकर जारी आदेश को वापस लेने के आदेश कलेक्टर को देने की मांग की है. ताकि आपातकाल जेसे आदेश से लोगों कों राहत मिल सके । साथ ही जिला अधिकारी सरलता से जनता के लिए उपलब्ध होकर उनकी फरियाद सुने एसे भी आदेश अधिकारियों को दिये जाये।