हमें हमेशा क्षमा मांगनी चाहिए और क्षमा करना चाहिए : डॉ संयमलता म सा

सुख साधन में नहीं साधना में है : डॉ कमलप्रज्ञा म.सा.

रतलाम । आज दिगम्बर समाज का आज क्षमापना पर्व है। और आज अनंत चतुर्थी भी है इस दिन अनन्तनाथ भगवान की साधना करना चाहिए । इस अवसर पर धर्मसभा को समबोधित करते हुए जैन दिवाकरीय महासाध्वी डॉ. संयमलता म सा ने कहा की रोड़ कितनी भी साफ हो धूल हो जाती है और मन कितना हि साफ हो भूल हो जाती है । इसलिए हमे हमे हमेशा क्षमा मांगनी चाहिए और क्षमा करना चाहिए । इस अवसर पर धारणी और चन्दनबाला का वृत्तांत सुनाते कहा की धारणी ने अपने शील की रक्षा के लिये स्वंय की जीभ खींचकर प्राण त्याग दिये । मुत्ता सेठानी ने चन्दनबाला के ईर्षा वश बाल कटवा दिये थे, हाथ पैर मे बेड़िया डलवा दी और हाथ मे उड़द के बाकले थे उसी समय भगवान महावीर जिनका पांच माह का पारना था तो वो नगर मे पधारे उनके 13 अभिग्रह थे जब वो चन्दन बाला के द्वार पर पधारे तो उनके 12 अभिग्रह पूर्ण हो रहे थे मगर एक अभिग्रह आँखों मे आशु वाला नाही फल रहा था तब प्रभु उनके द्वार से वापस जाने लगे तो चंदनबाला की आँखों मे आंशु आ गये और प्रभु का 13 अभिग्रह फल गया तब भगवान ने चंदनबाला के हाथो से पारना किया ।
इस अवसर पर डॉ कमलप्रज्ञा म सा ने फरमाया की संगीत के सात सुर का पहला सुर सा । सा हमें संदेश देता है की जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति सुखी होने का प्रयत्न करता रहता है । बच्चा भी रोकर माँ की गोद में जाकर सुखी होना चाहता है। इतनी दौड़ आप करते हो इतनी मेहनत करते हो सुविधा के लिए क्या आप फिर भी सुखी हो। व्यक्ति खूब मेहनत करता है सोचता है कि मुझे एक कार चाहिए, मेहनत करके व्यक्ति कार खरीद भी लेता है। तुरन्त खुश होता हैं, लेकिन बाद की परेशानियों से परेशान हो जाता है इसलिए मतलब गाडी लाने के सुख चार और दुख हजार है । संगीत सुर का पहला अक्षर सा हमें प्रेरणा देता है सुख साधन में नही साधना में है। सच्ची साधना संतोष की साधना है। पदार्थों की प्राप्ति के लिये साधन जरूरी है। परमात्मा की प्राप्ति की लिये साधना जरूरी है। हमारी गुरुवर्या संयमलता जी मसा पिछले 25 वर्षो से लगातार दोपहर 11.30 से 12.30 साधना कर रहे है और अगर दिन मे नही हो पाती तो रात्रि मे करते है और नवरात्रि के दिनों में सिर्फ 2 घंटे आराम करती है । तप और जप में लगातार लगे रहते है मसा की साधना का ही चमत्कार है आपकी मांगलिक कई लोगों के कष्ट को दूर करती है।