
रतलाम । पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा मे जैन दिवाकरीय महासाध्वी डा. श्री संयमलताजी मसा ने फरमाया की राजगृही नगरी में प्रभु महावीर ने 14 चार्तुमास किये । अर्जुन माली प्रतिदीन 07 व्यक्तियों की हत्या करता था। श्रावक था । जब सुर्दशन सेठ को पता चला कि प्रभु महावीर राजगृही पधार रहे है तो उसने प्रभु के दर्शन करने की ठानी, लेकिन नगर के बाहर अर्जुनमाली का खौफ था। माँ ने बेटे सुर्दशन सेठ को रोका। लेकिन सुर्दशन सेठ भयभीत नही हुआ। नगर के लोग देख रहे थे की अब सुर्दशन सेठ बचने वाला नही था। सुर्दशन सेठ नवकार का स्मरण करते हुए चल रहे थे, सामने अर्जुन माली 1000 मन का मुद्गल लेकरवार करने सामने आ गया, लेकिन सेठ
सुर्दशन सेठ विचलीत हुए बिना नवकार का स्मरण करता रहा, भयभीत नही हुआ और नवकार के प्रभाव से अर्जुन माली के भीतर जो यक्ष था वो निकल गया अर्जुन माली घडाम से जमीन पर गिर गया। सुदर्शन सेठ ने अर्जुनमाली प्रभु महावीर के बारे में बताया और फिर दोनो प्रभु के दर्शन को गए । सुर्दशन सेठ तो दर्शन वंदन कर के लौट गया । लेकिन अर्जुन माली ने प्रभु से दीक्षा ग्रहण की और 6 माह के कठोर संयम का पालन करके मोक्ष प्राप्त किया।
धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए साध्वी सौरभ प्रज्ञा मसा. ने अंतगढ़ सुत्र के अर्न्तर्गत अर्जुनमाली के पतन और प्रभु महावीर के शरण मे आने के बाद उत्थान का वृतांत श्रवण करवाया । छ: महीने का कठोर चारित्र का पालन किया बेले बेले पारणे किये पूर्व समय में लोगों को जो नुकसान पंहुचाया था उसके प्रत्युत्तर मे तिरस्कार अपमान, आहार पानी नही मिलना ऐसे कई उपसर्ग समतापूर्वक हँसते हँसते सहन करते हुए अर्जुन माली मात्र छ: महीने के संयम की पालना करते हुए सिद्ध बुद्ध मुक्त हो गए। डॉ. कमल प्रज्ञा महाराज ने प्रभु महावीर और गुरू की महिमा के ऊपर सुमधुर भजन सुनाया।
प्रवचन के पश्चात भगवान साध्वी डॉ अमितप्रज्ञा जी के निर्देशन में ऋषभ देव की मरूदेवी माता नाटिका का मंचन किया गया जिसमें अंशु चानोदिया मरुदेवी माता, पूजा सौलंकी भरत चक्रवर्ती राजा, विनोद कटारिया भगवान ऋषभ देव, छाया मुरार और शिवानी झामर ने ब्राह्मी और सुंदरी, अजय खमेसरा, अमृत कटारिया, विनोद बाफना, नवीन गांधी, पारस मेहता, रितेश कटारिया ने देवलोक के देव, नमन चानोदिया सेनापति, हार्दिक कटारिया सैनिक एवं सम्भव गाँधी ने वनमाली का पाठ अदा किया।



