- रक्तदान महाअभियान : देशभर में एक लाख यूनिट रक्त संग्रह कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य
- कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर इस विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकता है। इच्छुक व्यक्ति सम्पर्क करें
- “रक्तदान – जीवनदान है, यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।” — ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी
- जावरा रोड, गौरव पैलेस कॉलोनी, भाग्योदय भवन भी इस महाअभियान में सहभागी
- यह विशाल रक्तदान शिविर 24 अगस्त (रविवार) को प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित होगा
रतलाम। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 18वीं पुण्यतिथि के अवसर पर संस्थान द्वारा भारत और नेपाल में रक्तदान महाअभियान चलाकर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने का संकल्प लिया गया है। इन्हीं शिविरों की श्रृंखला में जावरा रोड, गौरव पैलेस कॉलोनी, भाग्योदय भवन, रतलाम पर भी 24 अगस्त को प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा।
इस अभियान के अंतर्गत देशभर के छह हजार से अधिक सेवा केंद्रों से एक लाख यूनिट रक्तदान एकत्र कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य है। संचालिका ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी ने बताया कि इस रक्तदान शिविर का आयोजन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय, सरकारी हॉस्पिटल एवं रोटरी क्लब के सहयोग से किया जा रहा है। यह शिविर न केवल रक्त की कमी को पूरा करेगा, बल्कि समाज में मानवता और विश्व बंधुत्व की भावना को भी सशक्त करेगा।
उन्होंने बताया कि एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों की जान बचा सकता है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है — यह केवल इंसान से इंसान को ही दिया जा सकता है। रक्तदान से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय होती है, आयरन लेवल संतुलित रहता है और हृदय रोग का खतरा कम होता है।
उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। दादी प्रकाशमणि की पुण्य स्मृति में आयोजितइस शिविर में शामिल होकर सभी को जीवन बचाने के इस महायज्ञ का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता तथा रक्तदान के 24–48 घंटों के भीतर शरीर में नया रक्त बनने लगता है।


