राजधानी में बन रहे पांच मंजिला वैश्य भवन का निर्माण लगभग पूर्ण
-शुभारंभ इसी वर्ष के अंत में
म.प्र. वैश्य कल्याण ट्रस्ट मंडल की इंदौर में संपन्न बैठक में भवन निर्माण की प्रगति की समीक्षा
इंदौर । म.प्र. वैश्य कल्याण ट्रस्ट द्वारा राजधानी भोपाल में रायसेन रोड पर बनाए जा रहे पांच मंजिला भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। भवन की पांचों मंजिलों का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल अंतिम चरण का काम ही शेष बचा है। संभवत: इसी वर्ष के अंत तक यह भवन प्रदेश के उन सभी वैश्य बंधुओं के लिए उपलब्ध हो सकेगा, जो अपने किसी भी कार्य से भोपाल आते रहते हैं। यह देश का पहला बहुउपयोगी भवन होगा।
ट्रस्ट के अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल की अध्यक्षता एवं वैश्य महासम्मेलन म.प्र. के आतिथ्य में होटल द पार्क में आयोजित बैठक में सभी सदस्यों ने भवन के निर्माण कार्य की गति, प्रगति एवं गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश के सभी वैश्य बंधुओं तक इसकी जानकारी पहुंचना चाहिए और राजधानी आने वाला कोई भी बंधु इस भवन की सुविधा का लाभ उठाने से वंचित न रहे। बैठक में भवन निर्माण समिति के संयोजक अरविंद बागड़ी, न्यासी मंडल के विनोद अग्रवाल, प्रेमचंद गोयल, टीकमचंद गर्ग, दिनेश मित्तल, विष्णु बिंदल, पवन सिंघानिया, संदेश जैन (जबलपुर), पूर्व मंत्री जयंत मलैया (दमोह), वी.के. गुप्ता. (नरसिंहगढ़), तरुण शाह (उज्जैन), योगेश गुप्ता ( भोपाल), प्रकाश अग्रवाल मोमबत्ती, अविनाश अग्रवाल ओएस्टर, संदीप जैन मोयरा भी उपस्थित थे जिन्होंने भवन निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए और भवन निर्माण की प्रगति की समीक्षा भी की। नवनिर्मित भवन में ग्राउंड फ्लोर पर बड़ा हाल, पहली मंजिल पर सभाकक्ष, दूसरी मंजिल पर कार्यालय, तीसरी एवं चौथी मंजिल पर 11-11 तथा पांचवीं मंजिल पर खुली छत की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बैठक में अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल सहित सभी ट्रस्टियों ने इस बात पर जोर दिया कि भवन निर्माण में सभी वैश्य बंधु आर्थिक सहयोग प्रदान करें और न्यूनतम 1 लाख रुपए की सहयोग राशि प्रदान कर प्रदेश ही नहीं, देश के वैश्य समुदाय के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करें।
बैठक में सभी न्यासियों की आम राय थी कि राजधानी होने से प्रदेश के दूर-दूर के शहरों, कस्बों से प्रतिदिन अनेक वैश्य बंधु भोपाल आते हैं। उनकी रात्रि विश्राम एवं संपर्क स्थल की समस्या को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के संरक्षक सदस्य ब्रह्मलीन रमेशचंद्र अग्रवाल ने कोई 10 वर्ष पूर्व राजधानी में वैश्य भवन के निर्माण का न केवल सपना देखा, बल्कि उसे साकार करने के लिए वैश्य महासम्मेलन के माध्यम से जमीन खरीदने से लेकर भवन निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू करवाई। उनका पूरा चिंतन इस बात पर रहा कि प्रदेश के सुदूर अंचलों में रहने वाले वैश्य बंधु भी इसके निर्माण में भागीदार बनें और भवन निर्माण के बाद राजधानी आने पर इस भवन की सुविधाओं का उपयोग भी करें। इस भवन के बनने से तहसील स्तर से लेकर गांव-गांव से भोपाल आने वाले सभी वैश्य बंधुओं को बहुत मदद मिलेगी। भोपाल में होने वाली अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इस भवन के बनने से एक नई सुविधा मल सकेगी। यह देश का पहला ऐसा भवन होगा, जिसका उपयोग सम्मेलन, ब्याह-शादी, सामाजिक कांफ्रेंस से लेकर व्यक्तिगत रूप से भोपाल आने वालों के लिए भी बहुउपयोगी साबित होगा। अब लगभग 5 वर्षों के मैराथन प्रयासों के बाद यह भवन अपने आकार में आ चुका है ।


