नैतिक शिक्षा को सिलेबस में अनिवार्य किया जावे

 

नैतिक शिक्षा को सिलेबस में अनिवार्य किया जावे

(उच्च शिक्षा के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार को पत्र)

इंदौर भाजपा नेता एवं सांसद प्रतिनिधि डॉ. संतोष वाधवानी ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि नैतिक शिक्षा को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में समाविष्ट किया जावे । यह देखने में आया है कि नैतिक शिक्षा अर्थात मोरल एजुकेशन उच्च शिक्षा में शामिल नहीं है और वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य मात्र अर्थोपार्जन रह गया है ,जबकि भारतीय दर्शन के अनुसार सच्ची शिक्षा वही है जो मानव को सही दिशा दिखाएं और जीवन का सही रास्ता दिखाएं।

नैतिक शिक्षा के अंतर्गत हम महापुरुषों की जीवनिया एवं उनके द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों को पढ़ते हैं लेकिन वर्तमान में उच्च शिक्षा के अंतर्गत सिर्फ और सिर्फ तकनीकी ज्ञान दिया जा रहा है जो की मनुष्यों में से मानवता को समाप्त कर एक प्रोफेशनल व्यक्ति को जन्म दे रहा है। आज चारों ओर अपराध और अनैतिकता यदि हमें दिखाई दे रही है तो इसका बहुत बड़ा कारण यह है कि शिक्षा में नैतिकता का अभाव है। ऐसे में उच्च शिक्षा के सिलेबस में नैतिक शिक्षा के पाठ्यक्रम का समाविष्ट किया जाना ।

आज समय की मांग है इस हेतु सांसद प्रतिनिधि डॉ संतोष वाधवानी ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार से मांग की है कि शीघ्र अति शीघ्र इस विषय पर संवेदनशील निर्णय ले।