शिव का नाम परम सत्य, मांगलिक और कल्याणकारी

शिव का नाम परम सत्य, मांगलिक और कल्याणकारी

गीता भवन में चल रहे श्रीरामकथा महोत्सव में स्वामी भास्करानंद के आशीर्वचन – धूमधाम से मना शिव पार्वती विवाह

इंदौर, । भगवान का शिव का नाम लेने से परम मांगलिक और कल्याणकारी भाव उत्पन्न होते हैं। शिव का नाम ही परम सत्य और आनंद प्रदाता के साथ मंगलमय भी है। भगवान शिव का श्रृंगार ही उनका स्वरूप है। उनकी लीलाएं देख और सुनकर लगता है कि उन्होंने सम्पूर्ण संसार को अपने भीतर समेट लिया है। उनका नाम लेने मात्र से ही मंगल भावों की सृष्टि प्रारंभ हो जाती है।
वृंदावन के प्रख्यात संत आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने  गीता भवन स्थित सत्संग सभागृह में गोयल पारमार्थिक ट्रस्ट एवं गीता भवन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में शिव पार्वती विवाह प्रसंग की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा में शिव पार्वती विवाह का जीवंत उत्सव भी जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट के आतिथ्य में धूमधाम से मनाया गया। व्यासपीठ का पूजन श्रीमती नीना-विनोद अग्रवाल, श्रीमती कनकलता-प्रेमचंद गोयल, कृष्णा-विजय गोयल, निधि-गोपाल गोयल, अमृता-आशीष गोयल, निधि-आनंद गोयल, स्वाति-अंकित गोयल एवं प्राची-आदित्य गोयल, किशोर गोयल, श्याम मोमबत्ती आदि ने किया। समूचा महोत्सव सभी प्रबुद्ध और निष्ठावान भक्तों के लिए खुला है, लेकिन प्रवेश पहले आएं पहले पाए आधार पर ही संभव होगा। गीता भवन में श्रीराम कथा महोत्सव का यह दिव्य आयोजन 22 जनवरी तक जारी रहेगा। रामकथा प्रतिदिन अपरान्ह 4 से सायं 7 बजे तक होगी। इस दौरान साध्वी कृष्णानंद भी उपस्थित रहेंगी। उनके श्रीमुख से मधुर भजनों की प्रस्तुतियां भक्तों को आल्हादित बनाए हुए हैं। महोत्सव के दौरान गीता भवन स्थित सभी देवालयों, विशेषकर राम दरबार मंदिर में भगवान का आकर्षक श्रृंगार कर प्रतिदिन 56 भोग समर्पित करने की तैयारियां की गई है। महोत्सव में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए यहां विशाल अन्नकूट महोत्सव का आयोजन होगा। 22 जनवरी को अयोध्या के रामलला मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के वक्त यहां भी रंगारंग आतिशबाजी और दीपों से सजावट का अनूठा दृश्य देखने को मिलेगा। इसी दिन संध्या को भी बाहर से बुलाई गई टीम द्वारा आकर्षक आतिशबाजी और अन्य दिलचस्प आयोजन होंगे।
स्वामी भास्करानंद ने कहा कि देवाधिदेव महादेव के दैविक, भौतिक और आध्यात्मिक रूप को जिसने समझ लिया, उसे समग्र सृष्टि में शिव तत्व के दर्शन हो जाएंगे और तब यह संसार दुखद नहीं, बल्कि सुखद और आनंददायक लगने लगेगा। भगवान शिव ने अपनी लीलाओं से जगत का कल्याण ही किया है। उनके जैसा कल्याणकारी कोई और नहीं हो सकता, जिसने राक्षसों से अमृत कलश छीनकर खुद अपने गले लगा लिया और समूची सृष्टि को राक्षसों के हाथों जाने से बचा लिया। यह शिव की विशेषता है कि वे अपनी लीलाओं का आभास तक नहीं होने देते। यदि हम उनकी लीलाओं, श्रृंगार और उनके गणों के रूप को देखें तो यही लगता है कि समूची सृष्टि उनके अंदर समाहित है। जब शिव समाधि से विलग हुए तो उन्होंने सबसे पहले राम का ही नाम लिया। राम इस देश की अस्मिता और गौरव के प्रतीक हैं।