रामकथा जहां भी होती है, वहां स्नेह, दया और करूणा की वर्षा अवश्य होती है – सुरेश्वरदास

रामकथा जहां भी होती है, वहां स्नेह, दया और

करूणा की वर्षा अवश्य होती है – सुरेश्वरदास

बर्फानी धाम के पीछे गणेश नगर में नौ दिवसीय रामकथा का शोभायात्रा के साथ हुआ शुभारंभ

इंदौर,  । समुद्र का पानी खारा होता है, लेकिन आकाश के सम्पर्क में आकर वर्षा जल के रूप में मीठा बन जाता है। सज्जनों और श्रेष्ठ लोगों की संगत में आकर हमारा भी चरित्र ऊंचा बन सकता है। रामकथा जहां भी होती है, वहां स्नेह, दया और करुणा की वर्षा अवश्य होती है। रामकथा संस्कृति और संस्करों का पोषण करती है। इसे हम भक्ति, कर्म और ज्ञान का संयोग भी कह सकते हैं, जिस तरह मोबाइल की बेटरी डिस्चार्ज होने पर उसे रिचार्ज करना होता है, उसी तरह रामकथा भी हमारे जीवन की उमंगों को रिचार्ज करती है।
कथा का शुभारंभ शिव-हनुमान मंदिर से बाजे-गाजे के साथ निकली कलश यात्रा से हुआ। मार्ग के लगभग सभी स्थानों पर घर-घर कलश यात्रा का स्वागत किया गया। रामकथा मर्मज्ञ डॉ. सुरेश्वरदास पैदल चल रहे थे। भजन एवं गरबा मंडलियां भी नाचते-गाते हुए चल रही थी। पुनः मंदिर आकर कलश यात्रा का समापन हुआ। समाजसेवी तुलसीराम-सविता रघुवंशी, रेवतसिंह रघुवंशी, देवकरण यादव, नारायणसिंह बघेल, गौरीशंकर मालवीय, रामसिंह राजपूत, बाबूसिंह राजपूत एवं सुश्री शतांशी रघुवंशी सहित अन्य भक्तों ने इसके पूर्व रामचरित मानस का पूजन किया। चैतन्य हनुमान, शंकरजी सहित बर्फानी दादा की समाधि का पूजन भी किया गया।
गणेश पूजन, ब्राह्मण पूजन, नवग्रह पूजन के बाद व्यासपीठ पर विराजित होकर डॉ. सुरेश्वरदास ने अयोध्या, संतों, सरयू एवं रामचरित मानस की महत्ता बताते हुए कहा कि रामकथा जीवन को मर्यादित और संस्कारित बनाती है। भगवान राम के चरित्र में कहीं भी दोष नहीं है। इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन भगवान राम ने कहीं नहीं किया है। आज हजारों वर्ष बाद भी उनके नाम से देश-दुनिया में जो अमृत्व का भाव देखने को मिल रहा है, वह भारत भूमि का आधार स्तंभ है। राम भारत भूमि की पहचान है। राम कथा हमारे विवेक को सही दिशा में ले जाने और परिवार को सुखी तथा यशस्वी बनाने के लिए राम कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।