भागवत चित्त के साथ बुद्धि की शुद्धि का भी ग्रंथ–आचार्य पं. योगेश्वरदास

भागवत चित्त के साथ बुद्धि की शुद्धि का भी ग्रंथ–आचार्य पं. योगेश्वरदास

लोहारपट्टी स्थित खाड़ी के मंदिर पर सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का शोभायात्रा के साथ शुभारंभ

इंदौर,। भागवत केवल ग्रंथ नहीं, हमारे विचारों को शुद्ध और परिष्कृत बनाने का मंत्र है। तन की सुंदरता बढ़ाने के लिए हमारे पास अनेक सौंदर्य प्रसाधन रहते हैं, लेकिन मन और विचारों का सौंदर्य केवल भागवत के संदेशों से ही बढ़ सकता है। भागवत चित्त की शुद्धि करने का ग्रंथ है। हम अपने चेहरे को चमकाने और निखारने के लिए जमानेभर के प्रयास करते हैं, लेकिन जिस मन पर परमात्मा की नजर रहती है, उसे साफ करने के लिए हमारे पास या तो समय ही नहीं है, या उस तरफ हमारी कोई रुचि नहीं है। भागवत बुद्धि की शुद्धि का भी ग्रंथ है।
भागवताचार्य योगेश्वरदास महाराज महाराज के, जो उन्होंने आज लोहारपट्टी स्थित श्रीजी कल्याण धाम, खाड़ी के मंदिर पर राधा रानी महिला मंडल के सहयोग से हंस पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी रामचरणदास महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हुए भागवत ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किए। कथा का शुभारंभ खाड़ी के मंदिर से यशवंतगंज, भरत मार्ग नलिया बाखल, इतवारिया बाजार होते हुए भागवतजी की शोभायात्रा के साथ हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते भागवतजी को मस्तक पर धारण कर नंगे पैर चलकर शोभायात्रा में भाग लिया। मार्ग में अनेक स्थानों पर शोभायात्रा के स्वागत किया गया। व्यासपीठ का पूजन महामंडलेश्वर स्वामी रामचरणदास महाराज के सानिध्य में श्रीमती वर्षा शर्मा, उर्मिला प्रपन्न, मंजू शर्मा, प्रफुल्ला शर्मा, हंसा पंचोली, ज्योति शर्मा कामाख्या, हेमलता वैष्णव, मधु गुप्ता आदि ने किया। शोभायात्रा में विश्व ब्राह्मण संघ के अध्यक्ष पं. योगेन्द्र महंत एवं म.प्र. ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. रामचंद्र शर्मा सहित अनेक विद्वतजन शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत पं. पवन शर्मा, पं. राजेश शर्मा, अशोक चतुर्वेदी, महंत यजत्रदास आदि ने किया। मठ के पं. पवनदास महाराज ने बताया कि भागवत ज्ञान यज्ञ का यह क्रम 30 दिसम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 3 से सायं 7 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान राम जन्मोत्सव, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन पूजा, रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र जैसे उत्सव भी मनाए जाएंगे। मंदिर का वार्षिक अन्नकूट महोत्सव 31 दिसम्बर रविवार को आयोजित होगा।
भागवताचार्य योगेश्वरदास ने भागवत की महिमा बताते हुए कहा कि भागवत हमारे अंतर्मन पर जमीं धूल को साफ करने का काम करती है। बाहर की सफाई तो हम कई तरह के साबुनों, क्रीम आदि से कर लेते हैं, लेकिन अंदर की सफाई के लिए भागवत जैसे धर्मग्रंथ ही डिटर्जेंट का काम करते हैं। विडंबना यह है कि हम जितना ध्यान बाहर की सफाई पर देते हैं, उतना भीतर की सफाई के प्रति उपेक्षित रहते हैं। भागवत हमारे चरित्र को सुदृढ़ और सुंदर बनाती है। चरित्र से ही हमारा प्रारब्ध बनेगा और प्रारब्ध से ही जीवन बनेगा तथा जीवन से ही व्यक्ति, समाज और समाज से विश्व को शुद्ध करने की क्षमता आएगी।