भारत संतों, भक्तों और अवतारों की ही भूमि: पंडित शास्त्री

भारत संतों, भक्तों और अवतारों की ही भूमि: पंडित शास्त्र
इंदौर। दुष्टों को मिलने वाली शक्ति अत्याचार करने में काम आती है, जबकि सज्जनों को जो शक्ति मिलती है वह समाज के कल्याण में प्रयुक्त होती है। अमृत मंथन के दौरान राक्षस चाहते थे कि सारी शक्तियां उन्हें ही प्राप्त होना चाहिए। आज भी यही स्थिति है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने भी कहा कि दुष्टों को पहले शांत करो। दुष्टों से अपना काम निकलवाने के लिए उन्हें पहले वंदन कर लेना चाहिए। भगवान के अवतार भी दुष्टों के नाश और सज्जनों के उध्दार के लिए होते हैं। राम और कृष्ण के बिना भारत भूमि की कल्पना भी संभव नहीं है। आज यदि भारत का गौरव बढ़ रहा है तो यह राम और कृष्ण जैसे अवतारों का पुण्य प्रताप ही है। भारत संतों, भक्तों और अवतारों की ही भूमि है।
कथा शुभारंभ के पूर्व मंडी अध्यक्ष संजय अग्रवाल, वरुण मंगल, आशीष मूंदड़ा, अशोक अग्रवाल, अंकुश अग्रवाल, राजाबाबू अग्रवाल, दिनेश बंसल, प्रवीण गर्ग, संतोष बंसल, विजय काला, नाथूलाल अग्रवाल, गणेश गोयल, गोविंद गर्ग भमोरी, अरविंद बागड़ी, रमेशचंद्र गुप्ताआदि ने व्यास पीठ का पूजन किया।
डा. शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्म जेल में हुआ। उनके दर्शन के लिए गोपियां एक-एक पल केलिए भी तरसती थी। भवान ने जितनी लीलाएं कीं, दुष्टों के नाश के लिए ही कीं। भगवान ने 125 वर्ष तक अपनी लीलाएं की हैं। उनकी प्रत्येक लीला में जीव मात्र के प्रति कल्याण का भाव रहा। जब-जब धर्म की क्षति होगी,भगवान फिर से पृश्वी पर अवश्य अवतार लेंगे। कथा में गुरुवार को बाल लीला, रास लीला एवं गोवर्धन पूजा के प्रसंग होगे।