हंसदास मठ पर आज से रोज सुबह तर्प
इंदौर,। कोई भी पितर अथवा पूर्वज अपनी संतान का बुरा नहीं चाहते, लेकिन उनकी आत्मा की शांति एवं मोक्ष के लिए हम यदि तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से जाने-अनजाने में उनके प्रति किए गए अपराध के लिए अपने कर्मों का प्रायश्चित कर सकें तो इससे श्रेष्ठ कोई काम नहीं हो सकता। केवल भारतीय संस्कृति में ही ऐसे शास्त्रोक्त प्रावधान है कि हम अपने बुरे कर्मों या आचरण का प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्त हो सकते हैं। तर्पण वह क्रिया है, जिसमें दिवंगतों के साथ हमारा भी कल्याण निहित है, क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ी भी हमारे लिए यह सब करना सीखेगी।
आज तर्पण अनुष्ठान में देश के लिए शहीदों, गोवंश, होल्कर शासकों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए भी मोक्ष की कामना की गई


