*रिश्ते बचाने के लिए जैसे अंदर हैं वैसे ही बाहर हो जाइए – पंडित विजय शंकर मेहता
*एक शाम रिश्तो के नाम कार्यक्रम का आयोजन*
*इंदौर * । कलयुग की दुनिया में रिश्ते नाजुक दौर से गुजर रहेहै । थोड़े से तनाव में सालों के रिश्ते टूट जाते हैं । रिश्तो को संभालना बहुत जरूरी है रिश्तो को संभालने के लिए जैसे आप अंदर हैं वैसे ही बाहर हो जाइए ।
उपरोक्त विचार जाने-माने जीवन प्रबंधन गुरु पंडित विजय शंकर मेहता ने लाभ मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में *एक शाम रिश्तो के नाम* को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। कार्यक्रम में किष्किंधा कांड का उल्लेख करते हुए राम , लक्ष्मण और सुग्रीव के प्रसंग की चर्चा की । उन्होंने कहा कि जब सुग्रीव ने सीता को ढूंढने में मदद करने में आनाकानी की तो राम जी को बड़ा गुस्सा आया लेकिन उन्होंने अपने गुस्से को कल पर टाल दिया । आज के जीवन में भी गुस्से को टालना ही जरूरी है। पल भर का गुस्सा सालों तक का नुकसान करता है । रिश्ते कमजोर हो जाते हैं रिश्तो को संभालने के लिए राम जैसा बनना जरूरी है जिन्होंने हमेशा गुस्से में रहने वाले अपने प्रिय भाई लक्ष्मण को संभाला । इसी तरह हम भी अपने परिजनों को संभाले क्योंकि रिश्ते होंगे तो परिवार होगा परिवार होगा समाज होगा और समाज है तो देश होगा । वैसे भी तकनीक में रिश्तों को काफी नुकसान पहुंचा है हर कोई मोबाइल टी वी की दुनिया में खो चुका है । रिश्ते औपचारिक बन कर रह गए हैं । ऐसे में स्वयं व परिवार को तकनीक के इस आक्रमण से बचना जरूरी है । इसके साथ ही रिश्तो को बचाने के लिए ना सुनने की आदत भी डालना होगी ना सुनने पर क्रोध लाना ठीक नहीं ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महात्योहार समिति के राष्ट्रीय समन्वयक श्री ओमप्रकाश पसारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजकुमार साबू व राष्ट्रीय संयोजक श्री रोहित सोमानी ने दीप प्रज्वलन किया तथा पंडित विजय शंकर मेहता का शाल श्रीफल से सम्मान किया। अपने उद्बोधन में श्री राजकुमार साबू ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम परिवारों के संबंधों की नई को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण साबित होंगे । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे । कार्यक्रम के प्रायोजक रॉयल रतन सच्चा मोती साबूदाना है ।


