ठाकुर जी क़ी भक्ति में चतुरता का कोई स्थान नहीं- गोस्वामी दिव्येश

ठाकुर जी क़ी भक्ति में चतुरता का कोई स्थान नहीं- गोस्वामी दिव्येश

इंदौर । संसार में जो व्यक्ति चतुर होता है वह अपने चतुराई के कारण आदरणीय होता लेकिन भक्ति में चतुराई का कोई काम नहीं वहाँ तो भक्त का मूढ़ यानी सरल होना जरुरी होता है। अपने स्वभाव पर नियंत्रण ही सेवा का तात्पर्य होता है। भगवान क़ी भक्ति में चतुरता का कोई स्थान नहीं है। हम ज़ब भी ठाकुर जी क़ी भक्ति करें तो फल प्राप्ति क़ी कामना से नहीं करनी चाहिए क्योंकि भगवान क़ी भक्ति के लिए चतुर नहीं मूढ़ यानी सरल होना चाहिए। वैसे तो पशुओं व मनुष्यों में कर्म क़ी बहुत समानताएं है लेकिन धर्म ही एकमात्र ऐसा कर्म है जो मनुष्य को पशुओं से अलग रखता है।
यह बात गोस्वामी दिव्येश जी महाराज ने मल्हारंगज स्थित गोवर्धननाथ हवेली प्रांगण में जारी पुरूषोत्तम मास महामहोत्सव के द्वितीय सत्र नंदकुमाराष्टकम के चौथे दिन सोमवार को मंदिर परिसर में उपस्थित वैष्णवजनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। सोमवार को बड़ौदा गुजरात से पधारी माधवी शाह व उनकी मंडली द्वारा प्रस्तुत कृष्ण लीला भजनों पर वैष्णव महिलाओं ने भाव पूर्ण नृत्य भी किया। सोमवार को व्यासपीठ का पूजन कुमार कुम्भज, वल्लभ भाई सोनी, सुरेश ठाकुर, जयकृष्ण नीमा ने किया।

इंदौर से विनोद गोयल की रिपोर्ट