नीट भ्रष्टाचार – अपरम्पार

प्रो. देवेन्द्र कुमार शर्मा

           जब नीट परीक्षा में भ्रष्टाचार का समाचार आया तब पूरा देश परेशान और निराश हो गया। असंख्य विद्यार्थी और उनके अभिभावक दुखी और परेशान हो गए। इस वर्ष के पूर्व भी प्रश्न पत्र बिकने के समाचार सामने आए हैं। इस वर्ष आए समाचार का एक प्रमुख बिंदु यह है कि पेपर सेटर ही पेपर आउट करते रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जब से नीट बना तब से भ्रष्टाचार निरन्तर चलता रहा है। शायद पूर्व में भी पेपर सेटर के द्वारा ही पेपर लीक किए जाते रहे हैं किन्तु पता नहीं लगता था। एक परिवार ने तो भ्रष्टाचार का ठेका ही ले रखा है। उसके कई बच्चे भ्रष्टाचार से मेडिकल में प्रवेश पा चुके हैं। जो व्यक्ति 70 लाख रुपए लेकर पेपर प्रश्न पत्र खरीदता है वह उसे अन्य को बेचकर अपार धन बनाता है। 70 लाख से चला प्रश्न पत्र अंत में 30 हजार तक बिक गया। इस भ्रष्टाचार के समाचार से ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अधिकतर विद्यार्थियों पर जो गुजरी होगी उसका अनुमान लगाना लगभग असंभव है।

केन्द्र सरकार द्वारा नीट परीक्षा के आयोजन के प्रारंभ का श्रेय मध्यप्रदेश को जाता है। कुछ वर्षों पूर्व मध्यप्रदेश में मेडिकल परीक्षा में चल रहे भयंकर भ्रष्टाचार का विस्फोट हुआ था। इसको उजागर करने का श्रेय रतलाम के तत्कालीन विधायक शिक्षाविद् पारस सकलेचा को जाता है। उसमें कई युवाओं की मृत्यु भी हुई थी। वे स्वयं मरे या मारे गए, इसका पता आज तक नहीं चल सका। इस हृदय विदारक काण्ड पर निर्णय आने में भी कई वर्ष लग गए। भारत की न्याय व्यवस्था भी निराली है और प्रशासन भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त। भ्रष्टाचार पर हम पहले भी लिख चुके हैं। वास्तव में देश चारित्रिक संकट की गिरफ्त में है। हम सब चाहते है कि हमारा काम हो जाए, उद्देश्य पूरा हो जाए चाहे उसके लिए हमें कितना ही खर्च करना पड़े।

यह विद्यार्थियों का दुर्भाग्य है कि देश में शिक्षा बिकाऊ हो गई है। यह वास्तविकता सभी जानते हैं। सरकार भी जानती है लेकिन दुर्भाग्य से कोई एसी कार्रवाई नहीं हो पाई जिससे मेडिकल परीक्षा की पवित्रता-सुचिता बनी रहे। यद्यपि वर्तमान की केन्द्र सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे, लेकिन प्रशासन और शिक्षा से जुडे व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते ही रहे हैं। सच तो यह है कि भ्रष्टाचार अनंत है, कभी पकड़ में आ जाता है, अधिकतर नहीं। हरि अनंत हरि कथा अनंता, यही युक्ति मेडिकल परीक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी लागू होती है।

वर्तमान में देश में प्रत्येक विभाग का एक माफिया सक्रिय है। धनाढ्य इसका लाभ उठा लेते हैं और गरीब सजा पाते हैं। कोई विद्यार्थी कितना भी बुद्धिमान हो वह अपने उस सहपाठी की बराबरी कभी नहीं कर सकता जिसने भ्रष्टाचार से पेपर पहले ही प्राप्त कर लिया था। 50 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत होने से जो कुछ गलत होता है उसका ज्ञान है। साथ ही पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी से बेईमानों की चालाकी का पता चलता ही रहता है। परंतु बहुत कम बार ऐसा हुआ कि भ्रष्टाचारियों को तुरंत कोई सजा मिली हो।

मध्यप्रदेश में व्हीपीपीएम – बनने के पूर्व बीएससी -1 के आधार पर मेडिकल में प्रवेश होता था। तब इतने घोटाले नहीं होते थे। बहुत कम बार कोई नंबर बढ़वाने के लिए आता था, फिर व्हीपीपीएम बना और मेडिकल में प्रवेश परीक्षा में घोटाले शुरू हो गए। मध्यप्रदेश में हुए मेडिकल प्रवेश घोटाले ने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी थी। परिणामस्वरूप केन्द्र सरकार ने एक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी नीट के नाम से बनाई, परंतु घोटाले नहीं रुके। एक के बाद एक घोटाले होते ही गए। पिछले वर्षों में हुए घोटाले भी सामने आए थे, किन्तु किसको सजा हुई यह पता नहीं हुआ। लोग भूल जाते हैं और भ्रष्टाचारी बच निकलते हैं। तमिलनाडु में नीट को स्वीकार ही नहीं किया और उनकी अपनी व्यवस्था के अनुसार प्रवेश देते हैं। यह बात निश्चित है कि राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश की परीक्षा की व्यवस्था नीट पूरी तरह असफल हुई है।

मेडिकल कोचिंग का व्यवसाय बहुत फल-फूल रहा है। कोचिंग संस्थाएं प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए कमा रही हैं। उनमें भी विद्यार्थियों को बहुत मानसिक तनाव में डाला जाता है। इसके कारण कई विद्यार्थी आत्महत्या कर लेते है। पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल प्रवेश की इच्छा बहुत बढ़ गई है। इसका मूल कारण जीवन में धन कमाने की इच्छा है। इसी कारण विद्यार्थियों और उनके अभिभावक किसी न किसी तरह मेडिकल में प्रवेश पाना चाहते है। जो सम्पन्न होते हैं वे इसके लिए बहुत धन खर्च करने को तैयार होते है। इस तरह प्रवेश पाने के कई दुष्परिणाम होते हैं। जो पैसा खर्च करके डाक्टर बनेगा वह अधिक से अधिक धन कमाना चाहेगा। वर्तमान में मेडिकल व्यवसाय की धन कमाने की असीमित लालसा सब जानते हैं। इसी कारण मेडिकल प्रवेश के लिए भ्रष्टाचार का सहारा लिया जाता है।

प्रश्न यह है कि भ्रष्टाचार मुक्त मेडिकल प्रवेश परीक्षा व्यवस्था कैसे बनाई जाए। यह तो स्पष्ट है कि नीट अपने उद्देश्य में पूरी तरह असफल हुआ है। हमारा देश बहुत बड़ा है। प्रतिवर्ष मेडिकल में प्रवेश चाहने वाले विद्यार्थियों की संख्या बहुत बड़ी होती है। जो भ्रष्टाचार होता है यह पता लगाना लगभग असंभव है। कितने लोगों ने बेईमानी से वास्तव में प्रवेश लिया यह कभी पता नहीं चलता। कुछ लोग पकड़े जाते है, समय निकल जाता है और सब भूल जाते हैं। पिछले कई वर्षों में नीट में पेपर आउट होने के कई प्रकरण सामने आए किन्तु यह पता नहीं लग सका कि कितने लोगों को सजा हुई। यद्यपि कुछ लोगों के प्रवेश निरस्त किए गए किन्तु प्रतिवर्ष होने वाले घोटाले को रोका नहीं जा सका। पुन परीक्षा कराने के निर्णय से ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को ही कष्ट होता है। बेईमान को कोई फर्क नहीं पड़ता। ईश्वर जाने इस चारित्रिक संकट से देश को कब मुक्ति मिलेगी।