सभी धर्म में नेत्रदान को महादान माना गया

        अमर मानवता की पहचान ” नेत्रदान”

रतलाम। नेत्र प्रकृति की सर्वाधिक आश्चर्यजनक वस्तुओं में से एक है। यह वाणी से भी श्रेष्ठ होती है तथा शारीरिक दृष्टि से सुंदरता और ज्ञान का प्रतीक होती है। इसलिए सभी धर्म में नेत्रदान को महादान माना गया है। यह दान निस्वार्थ भाव से किसी के जीवन को अंधकार से मुक्ति दिलाकर जीवन रोशन कर देता है ।नेत्रदान मानवता का सर्वाधिक कारुणिक भाव है, जो प्रेम का सर्वोच्च और उत्कृष्ट कृत्य है, एवं मोक्ष प्राप्ति का दिव्य द्वार भी। इससे बड़ा परोपकार एवं उपहार क्या हो सकता है जो अंधे व्यक्तियों को रोशनी प्रदान करे। जब शरीर नश्वर है व उसका उपयोग किसी को दृष्टि प्रदान करने में समर्थ है ,तो इससे बड़ी उदार विरासत क्या हो सकती है, जो दूसरों की आंखों में जीवंत बनी रहे ।नेत्रदान में मूल रूप से कॉर्निया का उपयोग किया जाता है, जो आंखों की सबसे आगे की परत होती है। यह एक पारदर्शी संरचना होती है जो प्रकाश को आंखों में प्रवेश कराती है। नेत्र प्रत्यारोपण में इसी कॉर्निया के ऊतक का उपयोग होता है। यह उन लोगों की दृष्टि बहाल करता है जो कॉर्निया के कारण दृष्टिहीनता से पीड़ित है , या किसी चोट या संक्रमण के कारण दृष्टिबाधित है। नेत्रदान के उपरांत आंखों को नेत्र बैंक में रखा जाता है वहां से इसका उपयोग किया जाता हैं।इसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है जो गोपनीय होता है, तथा जिन आंखों का कॉर्नियल प्रत्यारोपण संभव नहीं हो पाता उसका उपयोग चिकित्सा अनुसंधान एवं मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए दे दिया जाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि से पीड़ित एवं मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने वाले व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। इसमें प्रसिद्ध प्रशिक्षित पंजीकृत डॉक्टर द्वारा 10 से 15 मिनट का समय लगता है तथा यह मृत्यु के चार से छह घंटे के भीतर किया जा सकता है। नेत्रदान के लिए परिवार की सहमति से आई बैंक को सूचित करना होता है। मृतक की आंख बंद करके इसे गीले कपड़े से ढक दें एवं आंखों की सुरक्षा के लिए पंखा बंद करके ए.सी. या कूलर चला दे ।नेत्रदान के लिए यह ध्यान रखना होता है कि एड्स, हेपेटाइटिस बी अथवा सी, रेबीज ,टिटनेस अथवा संक्रामक रोग की स्थिति में नेत्रदान नहीं किया जा सकता। नेत्रदान मन को प्रसन्नता देने वाला कारक है, दूसरों की मदद करने का ज्ञान आपको प्रसन्नता एवं संतुष्टि प्रदान करता है ।यह वह सामाजिक कार्य है जो आपके अपनों को जीवन में बनाए रखता है। इसके सुकून का एहसास हमें आत्म संतोष भी देता है तथा मानवता के सकारात्मक संदेश की विरासत को जीवन रक्षक के रूप में आगे बढाता है।                                                           इसी क्रम में आज जवाहर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रतलाम कि शिक्षिका श्रीमती विनीता ओझा के नेत्रदान ने दो लोगों की जिंदगी को रोशन किया।