अनुभूति संस्था की काव्य गोष्ठी सम्पन्न
रतलाम । मानव जीवन में हम बहुत बार उतार चढ़ाव से अवगत होते रहते है । वैसे ही साहित्य में विभिन्न रसों से आनंदित होते है । काव्य गोष्ठी में कविता, गीत, गजल, व्यग्ंय, रचनाओं में मुझे प्रभावित किया इस कारण मैं अभिभूत हूं ।
उक्त विचार साहित्यकार चिंतक श्री बाबुलाल परमार रावटी (राष्ट्रपति द्वारा शिक्षक सम्मान से सम्मानित), ने साहित्यिक संस्था ”अनुभूतिÓÓ द्वारा श्री शांतिलाल गोयल शांतनु के निवास (शांताकारम भवन) डोंगरे नगर रतलाम में आयोजित काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
काव्य की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामचन्द्र फुहार ने कहा कि कविता में प्रकृतिके उपमा, उपमान एवं प्रतिक का जितना सही व सार्थक उपयोग होगा तो उसे कविता अदभुत सुंदर व सजीव हो जाती है। अच्छी कविता कालजयी के रूप में प्रसिद्ध होती है। इसलिए साहित्यकार को अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का सृजन करना चाहिए। आज की गोष्ठी गंभीर व प्रभावी रही है । इस हेतु अनुभूति संस्था के पदाधिकारियों को साधुवाद ।
काव्य गोष्ठी में सर्वश्री प्रणयेश जैन, हरिशंकर भटनागर, दिनेश जैन, डॉ. मोहन परमार, सिद्दीक रतलामी, बाबुलाल परमार, रामचन्द्र फुहार, लक्ष्मण पाठक, राजेश रावल, शांतिलाल गोयल शांतनु, शिवराज जोशी, प्रकाश हेमावत, सुभाष यादव, निसार पठान (रंभापुरी झाबुआ), धनजंय तबकड़े, गौरीशंकर खिंची, कैलाश वरिष्ठ, दिलीप जोशी, श्यामसुंदर भाटी, जवेरीलाल गोयल, मुकेशसोनी ”सार्थकÓÓ आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया ।
प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूवात की । संस्था द्वारा अतिथि का स्वागत किया गया। संस्था अध्यक्ष डॉ. मोहन परमार द्वारा अतिथि परिचय दिया गया। कार्यक्रम का संचालन गीतकार लक्ष्मण पाठक एवं आभार गोष्ठी संयोजक श्री शांतनु द्वारा किया गया।




