आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय है – मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी म.सा.

दिगंबर जैन महिला मंडल ने रक्षाबंधन पर्व पर मुनि श्री को राखी भेंट की

रतलाम। 9 अगस्त 2025 – श्रुति संवर्धन वर्षा योग 2025,श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड, रतलाम आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी म. सा. के शिष्य मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी म.सा. एवं क्षुल्लक 105 श्री परम योग सागर जी म.सा. द्वारा चंद्रप्रभा मंदिर पाट पर विराजित है।
प.पू. मुनि श्री 108 श्री सद्भाव सागर जी मसा ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि जब जीव की परिणिति दया अनुकंपा प्रशस्त होती है तो जगत का भाव करता है जैसे मेरा जीव है वैसा ही संसार में प्रत्येक का जीव है यह भाव पर्याय है और ऐसी पवित्र भाव से रक्षा का भाव करता है कोई भी व्यक्ति वंदना नहीं चाहता लेकिन इंडियन धर्म कहता है । बंधन में सुख है जो आपको शाश्वत सुख की ओर ले जाता है बंधन यानी मर्यादा, रक्षा, सुरक्षा की गारंटी, अनु के कष्ट करने का प्रयास है रक्षा सीखना है । बंधन में दो भाव उत्पन्न होते हैं पहले कष्ट और दूसरा मैत्री अगर कर्म सही नहीं होंगे और मोह का भाव आएगा तो यह मोक्ष मार्ग में कष्ट देता है। दूसरा बंधन मैत्री भाव का है मैत्री में सौहार्द सुरक्षा का भाव बनता है। एक अबला को पद देने का भाव है,सुरक्षा देने का भाव है और अकेलेपन से व्यक्ति में दो भाव आते हैं पहले देवत्व धारण करने का और दूसरा डिप्रेशन का भाव है। देवत्व जागृत कर लिया तो मोक्ष की गति निश्चित है। यह पर्व दो तरीके से मनाया जाता है पहले ग्रेसन के लिए दूसरा संन्यास का पर्व है। सिध्दालय आत्मा का वास्तविक घर है। अपने शाश्वत ध्रुव को अपना घर मानो।
विश्वराज भूमि की कथा में तीन भूमि राजा बलि को दी और सारे मुनियों का उपसर्ग दूर हो गया वह आज का ही दिन था इसलिए रक्षाबंधन पर मनाया जाता है। यह प्राणी मात्र का रक्षा करने का पर्व मनाया जाता है। उक्त विचार अपने व्याख्यान में दिये। दिगंबर जैन महिला मंडल ने रक्षाबंधन पर्व पर मुनि श्री को राखी भेंट की।
कविता अग्रवाल, चारु अग्रवाल, नेहा अग्रवाल द्वारा मुनि श्री को हाथ से बनाकर रक्षा सूत्र के रूप में राखी भेंट साथ में महिला मंडल की सदस्यये सभी महिलाओं ने राखी मुनि श्री को भेट की। उक्त जानकारी श्री चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन श्रावक संघ रतलाम के संयोजक मांगीलाल जैन ने दी।